कब करें गयाजी मे गयाश्राद्ध,पिंडदान ।
ॐ नमो नारायणाय नमःगयायै नमः
श्राद्धरम्भे गयायं ध्यात्वा ध्यात्वा देव गदाधर। स्व् पितृ मनसा ध्यात्वा ततः श्राद्ध समाचरेत्।।
।। गया श्राद्ध का उपयुक्त समय ।।
गयायाम् सर्वकालेषु पिंडम दधात् विचक्षणः।
अधिमासे जन्मदिनेअस्ते च गुरु - शुक्रयोः।
न त्यक्रवयं गया श्राद्ध सिंहस्थे च वृहस्पतौ । ।
गयश्राद्ध प्रकूप्रीत संडक्रान्तयादौ विशेषतः।
मीनेमेषे स्थिते सूर्ये कन्यायां कार्मुके घटे।
दुर्लभं त्रिषु लोकेषु गयायाम् पिण्डपातनं (वायु पुराण) ।।
शास्त्रों के वचनानुसार गयश्राद्ध सभी समय कर सकते है यह स्पष्ठ निर्देश है व विशेषतः अधिमास ,जन्मदिन ,गुरुशुक्र के अस्त में सिंह राशि में , वृहस्पति होने पर गया तीर्थ में पिण्डदान का त्याग न करे । मीन(चैत्र माह ) ,मेष(वैशाख माह ),कन्या (आश्विन माह),धनु (पौष माह) , कुंभ(फाल्गुन माह),मकर (माघ माह), राशि में सूर्य स्थित होने पर गया श्राद्ध(पिंडदान )करे ।। ॐ नमो नारायण । गया श्राद्ध का शास्त्रों द्वारा वर्णित समय के सम्बन्ध में वायु पुराण व अन्य पुराणों में कहा गया।
गया जी तीर्थ पुरोहित पंडित गोकुल दुबे
संपर्क सूत्र 9334720974 ,7781959952